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Showing posts from July, 2020

मुसाफिर

मुसाफिर रोज़ चले हम खोज में , अपने अन्दर के टूटे दिल को जोड़ने . राह मे मिलजाते है मुसाफिर , कुछ मुस्कुराकर चल दिए अपने रास्ते , कुछ पत्तर फेंके हौसला तोड़ने , कुछ बैठे अपने ही सोच में , कुछ दौडे है मंज़िल की चाह मे , कुछ बेफिकर दुनिया की दौड़ मे , कुछ जले है दूसरो मै आप को तोल के , कुछ बेहाल है मुश्किलो के सामने , कुछ खुश है कोई भी राह मै , कुछ अपने मीठे बोल से बहुत कुछ जोड़ते , कुछ बातोही बातो में हमसफ़र बने, यूंही चलते चलते बहुत कुछ सीखे, मुसाफिर अनेक, रास्ते अनेक, तरीके अनेक |   न रुखना , न झुकना, बस अपने दिल की राह में हुम्हे चलते ही जाना !